रविवार, 10 मार्च 2013

गवाक्ष – मार्च 2013



जनवरी 2008 गवाक्ष ब्लॉग के माध्यम से हम हिन्दी ब्लॉग-प्रेमियों को विदेशों में रह रहे हिन्दी/पंजाबी के उन लेखकों/कवियों की समकालीन रचनाओं से रू--रू करवाने का प्रयास करते आ रहे हैं जो अपने वतन हिन्दुस्तान से कोसों दूर रहकर अपने समय और समाज के यथार्थ को अपनी रचनाओं में रेखांकित कर रहे हैं। गवाक्ष में अब तक विशाल (इटली), दिव्या माथुर (लंदन), अनिल जनविजय (मास्को), देवी नागरानी(यू.एस..), तेजेन्द्र शर्मा(लंदन), रचना श्रीवास्तव(लंदन), पूर्णिमा वर्मन(दुबई), इला प्रसाद(यू एस ए), भगत धवन (डेनमार्क), चाँद शुक्ला (डेनमार्क), वेद प्रकाश वटुक’(यू एस ए), रेखा मैत्र (यू एस ए), तनदीप तमन्ना (कनाडा), प्राण शर्मा (यू के), सुखिन्दर (कनाडा), सुरजीत(कनाडा), डॉ सुधा धींगरा(अमेरिका), मिन्नी ग्रेवाल(कनाडा), बलविंदर चहल (न्यूजीलैंड), बलबीर कौर संघेड़ा(कनाडा), शैल अग्रवाल (इंग्लैंड), श्रद्धा जैन (सिंगापुर), डा. सुखपाल(कनाडा), प्रेम मान(यू.एस..), (स्व.) इकबाल अर्पण, सुश्री मीना चोपड़ा (कनाडा), डा. हरदीप कौर संधु(आस्ट्रेलिया), डा. भावना कुँअर(आस्ट्रेलिया), अनुपमा पाठक (स्वीडन), शिवचरण जग्गी कुस्सा(लंदन), जसबीर माहल(कनाडा), मंजु मिश्रा (अमेरिका), सुखिंदर (कनाडा), देविंदर कौर (यू के), नीरू असीम(कैनेडा), इला प्रसाद(अमेरिका), डा. अनिल प्रभा कुमार(अमेरिका) और डॉ. शैलजा सक्सेना (टोरंटो,कैनेडा), समीर लाल (टोरंटो, कनाडा), डॉक्टर गौतम सचदेव (ब्रिटेन), विजया सती(हंगरी), अनीता कपूर (अमेरिका), सोहन राही (ब्रिटेन), प्रो.(डॉ) पुष्पिता अवस्थी(नीदरलैंड) और अमृत दीवाना(कैनेडा) आदि की रचनाएं और पंजाबी कथाकार-उपन्यासकार हरजीत अटवाल के उपन्यास सवारी के हिंदी अनुवाद की पचपनवीं किस्त आप पढ़ चुके हैं।
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गवाक्ष के इस ताज़ा अंक में प्रस्तुत हैं कैलिफोर्निया(यू.एस.ए.) से हिंदी कवयित्री मंजु मिश्रा के कुछ हाइकु और ब्रिटेन निवासी पंजाबी लेखक हरजीत अटवाल के धारावाहिक पंजाबी उपन्यास सवारी की छप्पनवीं किस्त का हिंदी अनुवाद
-सुभाष नीरव

कैलिफोर्निया(यू.एस.ए.) से

मंजु मिश्रा के कु हाइकु

यादें
(1)
सूखे फूलों-सी
निकलीं किताबों से
पुरानी यादें।

(2)
हँसे या रोयें
जीवन की माटी में
यादें ही बोयें।

(3)
आएँगी यूँ ही
जब-तब छलने
पुरानी यादें।

(4)
तेरी वो याद
चूड़ी-सी खनकी थी
बरसों बाद।

(5)
याद तुम्हारी
पहाड़ी नदी बन
बहा ले गई।
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मंजु मिश्रा
जन्म : 28 जून 1959, लखनऊ(उत्तर प्रदेश)।
शिक्षा : एम। ए.(हिन्दी)
सृजन : कविताएँ, हाइकु, क्षणिकाएँ, मुक्तक और ग़ज़ल।
सम्प्रति : व्यापार विकास प्रबंधक, कैलिफोर्निया (यू.एस.ए.)
ब्लॉग : http://manukavya.wordpress.com
ईमेल : manjushishra@gmail.com

9 टिप्‍पणियां:

PRAN SHARMA ने कहा…

YAH HAIKOO BAHUT ACHCHHA LAGAA HAI ---

TERI VO YAAD
CHOODEE SE KHANKEE
BARSON BAAD

Dr (Miss) Sharad Singh ने कहा…

Very nice...
Very Touching HAIKUS...

ashok andrey ने कहा…

Manju jee ki bahtareen haiku padvane ke liye Subhash jee aapka aabhar.

gurpreet ( poet ) ने कहा…

khubsurt haiku !

gurpreet ( poet ) ने कहा…

khubsurt haiku !

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

यादों पर बेहतरीन हाइकु ।

उमेश महादोषी ने कहा…

मंजू मिश्रा के हाइकु सशक्त हैं।

सुनील गज्जाणी ने कहा…

सम्मानिया सम्मानिया मंजू जी , सम्मानीय सुभाष जी
नमस्कार !
मंजू जी आप के चारो हाइकु मन के आस पास ही विचरण करते है। खूब सूरत !
साधुवाद , बधाई !

सुशील कुमार ने कहा…

यादों को लेकर अच्छी हाईकु हैं |